विदेशों
में हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जुड़े हिन्दी-प्रेमी
यहां
हम ऎसे हिन्दी प्रेमियों से परिचय करा रहे हॆं जो कि विदेशों में रहकर वर्षों से
हिन्दी के प्रचार-प्रसार में संलग्न हॆं। इनका परिचय विश्वजाल पत्रिका अनुभूति
एवं अभिव्यक्ति से लिया गया है।
|
सुश्री
पूर्णिमा वर्मन : संयुक्त अरब इमारात (यूएई) संपादक : विश्वजाल पत्रिका अभिव्यक्ति एवं अनुभूति |
श्री
सुमन कुमार घई : कनाडा |
|
श्री
अमरेन्द्र कुमार : अमेरिका |
डॉ.
पद्मेश गुप्त : यू.के. संपादक : पुरवाई |
|
श्री
तेजेन्द्र शर्मा : यू.के. |
श्री
सुरेन्द्रनाथ तिवारी
: अमेरिका |
| डा.
राम गुप्ता : अमेरिका |
|
| श्री
देवेन्द्र सिंह : अमेरिका |
अभिव्यक्ति
एवं अनुभूति
सुश्री पूर्णिमा वर्मन
जन्म : २७ जून १९५५
शिक्षा : संस्कृत साहित्य में स्नातकोत्त्तर उपाधि, स्वातंत्र्योत्तर
संस्कृत साहित्य पर शोध,पत्रकारिता और वेब डिज़ायनिंग में डिप्लोमा ।
कार्यक्षेत्र : पीलीभीत (उत्तर प्रदेश, भारत) की सुंदर घाटियों
जन्मी पूर्णिमा वर्मन को प्रकृति प्रेम और कला के प्रति बचपन से अनुराग रहा। मिर्जापुर
और इलाहाबाद में निवास के दौरान इसमें साहित्य और संस्कृति का रंग आ मिला। पत्रकारिता
जीवन का पहला लगाव था जो आजतक साथ है। ख़ाली समय में जलरंगों, रंगमंच, संगीत और
स्वाध्याय से दोस्ती।
कार्यक्षेत्र : पिछले बीर्सपचीस सालों में लेखन, संपादन, स्वतंत्र
पत्रकारिता, अध्यापन, कलाकार, ग्राफिक डिज़ायनिंग और जाल प्रकाशन के अनेक रास्तों
से गुज़रते हुए फिलहाल संयुक्त अरब इमारात के शारजाह नगर में साहित्यक जाल पत्रिकाऒं
अभिव्यक्ति और अनुभूति के संपादन और कलाकर्म में व्यस्त।
प्रकाशित रचनाएं :
कविता संग्रह : वक्त के
साथ (वेब पर उपलब्ध)
बिल्कुल नयी रचनाएं चिट्ठे
पर यहां देखें.
संपर्क : abhi_vyakti@hotmail.com
साहित्य
कुन्ज
श्री सुमन कुमार घई

जन्म : सुमन कुमार घई का जन्म १९५२ मे अम्बाला शहर में
हुआ, परन्तु अधिकतर बचपन लुधियाना में बीता।वहीं से बी एस सी करने के पश्चात् कुछ
समय तक पारिवारिक कारोबार में हाथ बंटाया। १९७३ में कनाडा आने के बाद कम्पयूटर
टैकनालोजी की शिक्षा प्राप्त की और इसी क्षेत्र में १९८१ में कार्यरत रहे। बाद
में १९८१ से फिर से पारिवारिक कारोबार में प्रवेश किया।
आपका कहना है "बचपन से ही साहित्य के प्रति रुचि रही है। पढ़ना और लिखना हमेशा
से ही मन लगाने का साधन रहा है। परन्तु विदेश में इतनी देर से रहने के कारण भाषा
से सम्बन्ध टूटता सा जा रहा था। अब फिर से इन्टरनेट ने यह सम्बन्ध जागृत कर दिया
है।"
साहित्य कुंज नामक जाल पत्रिका के संपादक सुमन घई ने हिन्दी लिपि में "शायरी"
नाम से गज़लों और नज़्मों की एक सुन्दर संग्रह विश्वजाल पर तैयार किया है जिसमें
२८१ शायरों की १४५० से भी ज्यादा गज़लों और नज़्मों का संकलन किया गया है।
वे अभिव्यक्ति में परिक्रमा के अंतर्गत 'कनाडा कमान' स्तंभ लिख रहे हैं।
ई मेल : sumanghai@hotmail.com, sumankghai@yahoo.ca
क्षितिज
श्री अमरेन्द्र कुमार

जन्म : २४ नवंबर १९७३ मुज़फ्फरपुर बिहार
शिक्षा - स्नातक यान्त्रिकी अभियंत्रण, मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट
आफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद तथा स्नातकोत्तर उद्योग व व्यवस्था अभियंत्रण, ओहायो स्टेट
विश्वविद्यालय, अमेरिका से
सम्प्रति - इंजीनियर, ट्रांसफ्रेट, अमेरिका
अन्य-साहित्य संगीत व कला में रुचि। २००२ में ' क्षितिज साहित्य
कला परिषद' की स्थापना और वर्तमान में अमेरिका से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका 'क्षितिज'
के संपादन और प्रकाशन में संलग्न।
ई मेल : amarendra@kshitiz.net

जन्म : ५ जनवरी १९६५ को लखनऊ के समाजसेवी एवं प्रतिष्ठित
परिवार में जन्म।
शिक्षा : पी.एच. डी, अंग्रेजी , हिन्दी, उर्दू एवं फ्रेंच भाषाऒं
के जानकार।
कार्यक्षेत्र : हिन्दी साहित्य में कहानी, कविता एवं सम्पादन,
दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। मेनचेस्टर में १९९३ में हुए
अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन के दो सत्रों हेतु सह अध्यक्ष चुने गए एवं इस अवसर
पर 'हिन्दी भाषा ही भारतीय संस्कृति की वाहिनी' आलेख की प्रस्तुति। अनेक अम्तर्राष्ट्रीय
हिन्दी कार्यक्रमों की अध्यक्षता, संयोजन एवं संचालन। यू.के. में हिन्दी की एकमात्र
साहित्यिक पत्रिका 'पुरवाई' के सम्पादक एवं प्रकाशक। यू.के. हिन्दी समिति के अध्यक्ष
प्रेस्टन विश्वविद्यालय, लंदन में अमेरिकी मिडिलसेक्स कैम्पस के कुलपति।
प्रमुख कृतियां व सम्मान -
कविता संग्रह : आकृति, सागर का पंछी
संपादित : 'दूर बाग में सोंधी मिट्टी' यह संकलन भारत की स्वाधीनता
की स्वर्ण जयन्ती के उपलक्ष्य में यू.के. के २५ कवियों द्वारा रचित ५० कविताऒं
का संग्रह है। इसमें प्रत्येक कवि की तस्वीर के साथ उनका संक्षिप्त परिचय भी है।
एन. आर. आई. मदर इन्डिया इन्टरनेशनल एवार्ड ९२ से सिविल एविएशन मंत्री भारत सरकार
द्वारा सम्मानित तथा हिन्दी संस्थान द्वारा विदेशों में हिन्दी प्रचार एवं प्रसार
के लिए पुरस्कृत।
संपर्क : padmeshgupta@hotmail.com

जन्म: २१ अक्टूबर १९५२ (जगसंव - पंजाब) भ़ारत शिक्षा : एम ए़
अ़ंग्रेजी (दिल्ली विश्वविद्यालय)
समकालीन कथा साहित्य में तेजेन्द्र शर्मा एक चर्चित नाम है। काला सागर (१९९०) ढिबरी
टाईट(१९९४), देह की कीमत(१९९९) और यह क्या हो गया(२००३) उनके चार कहानी संग्रह
है। इसके अतिरिक्त ढिबरी टाइट नाम से पंजाबी में भी उनकी अनूदित कहानियों का एक
संग्रह प्रकाशित हुआ है।
तेजेन्द्र शर्मा की कहानियां उनके सजग साहित्यकार होने का प्रमाण है। उनके आसपास
जो कुछ घटित होता है वह उनके मानसिक रूप से उद्वेलित करता है। तमाम सवाल उनके जहन
में कुलबुलाने लगते हैं और तब उनकी लेखनी स्वयंमेव चलने लगती है।
वह परिवेश में से पात्र चुन लेते हैं जो पन्नों पर उनकी लड़ाई लड़ते हैं। विषय
वैविध्य और विषयों की सामायिकता तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों की एक अन्य विशेषता
है। कथा साहित्य में शिल्प एवं शैली के स्तर पर जो परिवर्तन हुये हैं, उनकी झलक
तेजेंद्र शर्मा की कहानियों में देखने को मिलती है। उनके कहानी संग्रह ढिबरी टाईट
के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है। अन्य पुरस्कारों
में सहयोग फाऊण्डेशन पुरस्कार, सुपथगा सम्मान एवं एअर इण्डिया मुंबई की ओर से मौन
हिन्दी साधना पुरस्कार मिल चुके हैं।
दूरदर्शन के लिये 'शांति' धारावाहिक का लेखन। अन्नु कपूर निर्देशित फिल्म 'अमय'
में नाना पाटेकर के साथ अभिनय। वे हिन्दी साहित्य के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय सम्मान
'अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान' प्रदान करनेवाली संस्था 'कथा यू क़े '
के सचिव है।
संपर्क : "Katha UK" <kathauk@hotmail.com>, kahanikar@hotmail.com

जन्म : ३० अगस्त १९५२ को चंपारण, बिहार में
शिक्षा : बी ई सिविल इंजीनियरिंग (भागलपुर विवि भारत), एम ई
इंजीनियरिंग मैनेजमेंट तथा एम बी ए(ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका)
कार्यक्षेत्र : भारतीय सेना के पूर्व कमीशंड अफसर। पिछले २०
वर्षों से अमेरिका में। ओहायो तथा न्यू जर्सी विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग
मैनेजमेंट का अध्यापन। ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की सिविल इंजीनियरिंग विभाग की
सलाहकार समिति के अध्यक्ष भी रहे।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के अध्यक्ष। हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति
को विदेशों में अक्षुण्ण रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य।
विदेशों में रहनेवाले भारतीयों की ताजा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति, भाषा, सभ्यता
की महत्ता का प्रचार-प्रसार।
कार्व्यरचना की मूल प्रेरणा भारत से, भारत के गाँवों से, यहाँ के लोकजीवन से
गहन प्रेम। महात्मा गांधी और रामधारी सिंह दिनकर के आदर्शों से प्रभावित। भ्रष्टाचार,
अन्याय और जातीय-धार्मिक सांप्रदायिकता का घोर विरोध, और एक अत्यंत भावुक, संवेदनशील
प्रेमिक हृदय के धनी।
संपर्क :
सम्प्रति : अमेरिका की ऊर्जा ( बिजली तेल) संबंधित परियोजनाऒं के प्रबंधन
से संबंधित।

डा राम गुप्ता भारत आस्ट्रेलिया और पश्चिम
अफ्रीका में रह चुकने के बाद पिछले बीस वर्षो से अमेरिका में हैं।
व्यवसाय से इंजीनियर वह रॉजर विलियम्स कॉलिज में प्रोफेसर और डेल्टा इंजीनियर्स
के अध्यक्ष हैं। अमेरिका में हिंदी के विकास से अनवरत जुड़े हैं। ब्राउन यूनीवर्सिटी
में बच्चों के लिये हिंदी शिक्षण प्रारम्भ करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
वे अमेरिका की हिन्दी पत्रिका "विश्वा" के सम्पादक मंडल में हैं। हिन्दी
में कविताऒं के अतिरिक्त कहानियॉ और बच्चों के लिये नाटक भी लिखे हैं।
ई मेल : rgupta@rwu.edu

राजस्थान में जन्मे अनूप भार्गव ने पिलानी से इंजीनियरिंग में
स्नातक और उसके बाद आई आई टी दिल्ली से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। पिछले काफी
समय से वे अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य में स्वतंत्र कंप्यूटर सलाहकार के रूप में
कार्यरत हैं।
वे अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के माध्यम से हिंदी संबंधी गतिविधियों
में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
उनका चिट्ठा यहां पढ़ा जा सकता र्है :
http://anoopbhargava.blogspot.com/
संपर्क : helloanoop@gmail.com, "Anoop Bhargava" <anoop_bhargava@yahoo.com>
हिन्दी
यू.एस.ए.
श्री देवेन्द्र सिंह
श्री देवेन्द्र सिंह अमेरिका में पिछले २६ वर्षों से रह रहे हैं और व्यवसाय से पर्यावरण इंजीनियर हैं। ये हिन्दी भाषा, हिन्दू संस्कृति एवं हिन्दुस्थान के उत्थान के लिए एक पूर्ण समर्पित कार्यकर्ता हैं। इन्होंने हिन्दी यूएसए नाम का एक समूह तैयार करके अमेरिका के स्कूलों में हिन्दी को एक एच्छिक भाषा के रूप में लाने का बीड़ा लिया हुआ है।
श्री देवेन्द्र सिंह हिन्दी महोत्सव एवं कवि सम्मेलनों जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करके हिन्दी भाषा के प्रचार एवं प्रसार में अपना योगदान दे रहे हैं। हिन्दी महोत्सव हिन्दी भाषा के प्रचार का अमेरिका में सबसे बड़ा कार्यक्रम है जिसमें लगभग २०० बच्चे अपनी हिन्दी बोलने एवं समझने की कला का प्रदर्शन करते हैं।
हिन्दी यूएसए द्वारा २० हिन्दी स्कूल चलाए जा रहे हैं जिनमें ७०० से भी अधिक विद्यार्थी हिन्दी भाषा का अध्ययन करते हैं। वार्षिक हिन्दी परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है और उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को प्रमाण-पत्र प्रदान किये जाते हैं।
श्री देवेन्द्र सिंह की पत्नी एवं २ बच्चे भी हिन्दी के अभियान में पूर्ण रूप से उनका सहयोग कर रहे हैं।
श्री देवेन्द्र सिंह से उनके ईमेल पते पर संपर्क किया जा सकता है।
ईमेल : devendra60@hotmail.com विश्व-जालस्थल www.hindiusa.org
उपरोक्त परिचय "अभिव्यक्ति
एवं अनुभूति" विश्वजाल-स्थल से लिये गये हैं।
उपरोक्त जानकारी में संशोधन के लिये कृपया ई-मेल द्वारा सूचित करने का कष्ट करें।
email : anurodh55@yahoo.com