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विश्व जाल पत्रिका अनुरोध भारतीय भाषाओं के प्रतिष्ठापन के लिए समर्पित समस्त संस्थाओं को एकमंच पर लाने हेतु प्रयासरत है। इस विश्व-जाल पत्रिका का प्रकाशन एवं संपादन अवैतनिक अव्यावसायिक एवं मानसेवी होकर समस्त हिन्दी प्रेमियों को समर्पित है। |
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¤सम्पादकीय कार्यालय : एल.आई.जी., ए.एस.१६/१७, गणपति एन्क्लेव, कोलार रोड, भोपाल-४६२०४२(म.प्र.)¤ ई-मेल : anurodh55@yahoo.com |
माह सितम्बर-२००९ |
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मुख्य समाचारबहुत फर्क है, ‘भारत’ और ‘इण्डिया’ में अचला शर्मा, पूर्व प्रभारी, बीबीसी (हिन्दी) भारत ने दुनिया में अपना मजबूत मुकाम बनाया है। यह बात अब विकसित देशों के शासनाध्यक्ष भी स्वीकार कर रहे हैं। हम दुनिया की आर्थिक शक्ति के तौर पर उभर रहे हैं। यह बात मंदी के इस दौर में सबके सामने जाहिर हो रही है। अब जब दुनियाभर के तथाकथित सम्पन्न देश आर्थिक मन्दी की मार से परेशान हैं, ऐसे में भारत ने अपने आपको सम्भाल रखा है। प्रगति की यह राह केवल आर्थिक क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की नजर में राजनीतिक तौर पर भी भारत की विश्वसनीयता बढ़ी है। सामाजिक नजरिए से देश में अभी परिवर्तन की काफी गुंजाइश है। आजादी के 62 साल में महिलाओं की प्रगति संतोषजनक रही है। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि महिलाओं ने ऐसा कोई भी क्षेत्र नहीं छोड़ा, जहां उनकी छाप न हो। आईटी, विज्ञान, मीडिया या फिर वित्त क्षेत्र, हर जगह महिलाओं ने अपनी काबिलियत साबित की है। मुझे सुकून होता है जब नई पीढ़ी से मिलती हूं। उनमें आत्मविश्वास की चमक के साथ ही भारतीयता का गौरव भी झलकता है। भारत के विकास की गाड़ी बढ़ रही है, देश फलफूल रहा है, इस बात की तसल्ली है, लेकिन अफसोस भी है कि विकास का फायदा निचले तबके तक नहीं पहुंच पा रहा। बीबीसी में रहते हुए मुझे जमीनी हकीकत से रू-ब-रू होने के कई मौके मिले। हर बार यह एहसास हुआ कि ‘भारत’ और ‘इण्डिया’ में बहुत फर्क है। यह केवल जुमला नहीं है कि देश का एक हिस्सा चमचमा रहा है तो दूसरा भाग आधारभूत सुविधाओं से भी वंचित है। हमने बीबीसी की एक शृंखला के दौरान एक गांव और एक शहर की लड़कियों को आपस में मिलवाया। यह मेल दो अलग-अलग धाराओं के मिलाप के जैसा था, जो दो धड़ों में बंटे देश की कहानी बयां कर गए। इन्हीं दिनों एक रिपोर्ट पढ़ी कि शाहरुख शान ने एक गांव को गोद लिया था, वहां लोगों ने पहली बार बिजली देखी। निजी तौर पर लोग प्रयास में जुटे हैं। देश में चुनौतियों और समस्याओं का अम्बार है, लेकिन व्यक्तिगत प्रयासों के साथ ही व्यवस्था को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। यह साझा दायित्व है, जिसे हम सब को मिलकर निभाना होगा। (पत्रिका 12 अगस्त,09 से) | ||||||
हिन्दी के औजार इंटरनेट पर हिन्दी के संसाधन और औजार-टूल्स<>अनुनाद व नारायण प्रसाद रचित फ़ॉन्ट परिवर्तन डाउनलोड फ़ॉन्ट रूपांतर डाउनलोड<>हिन्दी में कम्प्यूटर पर कैसे लिखें<>हिन्दी भाषा सॉफ़्टवेयर डाउनलोड कड़ी | ||||||
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हमारा उद्देश्य हमारा उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं की
रक्षा एवं देवनागनरी लिपि एवं अन्य भारतीय लिपियों की रक्षा करना है। जरा
विचार करें जब भारतीय भाषाएं एवं लिपियां ही नहीं रहेंगी तो इन भाषाओं में
लिखे गये साहित्य को कौन पढ़ेगा ? भाषाओं का सम्बन्ध सीधे संस्कृति से जुड़ा
होने के कारण जब भाषाएं ही नहीं रहेंगी तो संस्कृति भी धीरे-धीरे विलुप्त
हाती जाएगी। अत: भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण में आप अपना योगदान किस प्रकार
कर सकते हैं, कृपया ई-मेल द्वारा सूचित करें ताकि इनका प्रकाशन इस जाल-स्थल
पर किया जा सके। |
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