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माह सितम्बर-२००९

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मुख्य समाचार

सिब्बल ने कहा गणित और विज्ञान के समान हों पाठ्यक्रम

सभी स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाए

नई दिल्ली। केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने देश के समस्त बोर्डों से कहा है कि वे विज्ञान और गणित का समान पाठ्यक्रम बनाने के लिए अगले तीन साल में ठोस प्रारूप तैयार करें। उन्होंने इस कार्य को विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए कॊमन टेस्ट व्यवस्था शुरू करने के लिए जरूरी बताया है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी की पैरवी करते हुए इसे सभी स्कूलों में पढ़ाने पर जोर दिया है। सिब्बल ने काउंसिल ऒफ बोड्र्स आफ सेकेंडरी एजुकेशन की बैठक में कहा, ‘पर्यावरण तथा अन्य विषय तो राज्य व शहर के मुताबिक, अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन विज्ञान व गणित विषय में अंतर समझ से परे है।’

आखिर चार-चार बोर्ड क्यों: उन्होंने कहा, ‘देश में 41 बोर्ड हैं। एक राज्य में चार-चार बोर्ड आखिर क्यों होने चाहिए? हमें दीवारें तोड़कर बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करना चाहिए।’ सिब्बल ने कहा, ‘हमें पेशेवराना कोर्सों के लिहाज से पाठ्यक्रम की एक प्रणाली बनानी चाहिए। गणित व विज्ञान का समान पाठ्यक्रम होने से स्तर तथा गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।’

हिंदी पर जोर: सिब्बल ने कहा, ‘हमें हिंदी पर काफी जोर देना चाहिए। सभी बच्चे अपनी मातृभाषा की तरह हिंदी में महारत हासिल नहीं कर पाते। हिंदी देश के बाकी हिस्सों से छात्रों को जोड़ने के लिए जरूरी है। इसी तरह छात्र बाकी दुनिया से अंग्रेजी के मार्फत जुड़े रह सकते हैं।’ (दै.भा. 25.08.2009 से)

अंग्रेजी विरोधी नीति पर पड़ी फटकार

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मातृभाषा की अनिवार्यता पर शैक्षणिक संस्थाओं को फटकार लगाते हुए कहा है कि यह छात्रों के हित में नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने चेतावनी दी है कि विश्व में अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच संघर्ष कर रहे छात्रों के लिए यह हानिकारक सिद्ध होगा। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन, जस्टिस सदाशिवम और बीएस चैहान की खंडपीठ ने कहा कि छात्रों पर मातृभाषा थोपे जाने से वे नौकरियों की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार के फैसले के विरोध में यह बात कही। (दै.भा. 22 जुलाई, 09 से)

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हमारा उद्देश्य

हमारा उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं भारतीय भाषाओं की रक्षा एवं देवनागनरी लिपि एवं अन्य भारतीय लिपियों की रक्षा करना है। जरा विचार करें जब भारतीय भाषाएं एवं लिपियां ही नहीं रहेंगी तो इन भाषाओं में लिखे गये साहित्य को कौन पढ़ेगा ? भाषाओं का सम्बन्ध सीधे संस्कृति से जुड़ा होने के कारण जब भाषाएं ही नहीं रहेंगी तो संस्कृति भी धीरे-धीरे विलुप्त हाती जाएगी। अत: भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण में आप अपना योगदान किस प्रकार कर सकते हैं, कृपया ई-मेल द्वारा सूचित करें ताकि इनका प्रकाशन इस जाल-स्थल पर किया जा सके।
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