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माह अक्तूबर-२००९

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अंग्रेजी से सांस्कृतिक पहचान को खतराः राहुल देव

नई दिल्ली (25 सितंबर,09 प्रभासाक्षी)। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव का मानना है कि आने वाले समय में सारा भारत अंग्रेजी में काम कर रहा होगा, ऐसे में इसका सबसे ज्यादा असर भारत की देशी भाषाओं पर पड़ेगा और यह देश की सांस्कृतिक पहचान के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरेगा। भारतीय जनसंचार संस्थान में ‘हिंदी का भविष्य और भविष्य की हिंदी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में राहुल देव ने कहा कि यह भाषायी संकट हमें अमेरिकन क्लोन बनाने की तैयारी कर रहा है।

इस संगोष्ठी में नई दुनिया के राष्ट्रीय संपादक मधुसूदन आनंद ने कहा कि हम चाहे जैसी भी स्थिति देख रहे हों लेकिन स्थानीय स्तर पर हिंदी समेत अन्य भाषाओं के अखबारों और चैनलों के दर्शकों एवं पाठकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने बदलते समय और तकनीक के साथ-साथ हिंदी में भी जरूरत के हिसाब से परिवर्तन को जायज ठहराते हुए कहा कि जो भाषा समय के साथ नहीं बदलती, उसे खत्म होने से कोई नहीं बचा पाया है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हिंदी में भी हम लगातार बदलाव देख रहे हैं।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने कहा कि भविष्य में सरल और समझ में आने वाली हिंदी ही चलेगी। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में कई भाषाओं की जानकारी से भाषाओं के आदान-प्रदान की ताकत बढ़ती है।

भारत सरकार की ओर से मनाए जा रहे हिंदी प्रोत्साहन मास के अंतर्गत आयोजित इस संगोष्ठी में आज तक चैनल के समाचार निदेशक कमर वहीद नकवी ने कहा कि भाषाओं में बदलाव और शब्दों का लेन देन स्वाभाविक प्रक्रिया है। हर भाषा समाज और उसकी संस्कृति से जुड़ी होती है।

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